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यह सिर्फ आतंकी हमला नहीं
मोदी की रैली में सीरीयल बम ब्लास्ट सिर्फ आतंकी हमला नहीं बल्कि भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला है। यह एक उबाउ, थकाउ और बचाउ वाक्य है। विचारों को ढ़ाल देती डिफेंसिव शब्दों के मकड़जाल और ओवर संसदीय भाषा को बार-बार पढ़कर और सुनकर मैं तो थक चुका हूँ।
खरी-खरी कहूँ तो मेरे तहकीकात के अनुसार मोदी की रैली में सीरीयल बम ब्लास्ट सिर्फ आतंकी हमला नहीं बल्कि एक सांप्रदायिक हमला है। साजिश है, क्योंकि वहाँ एक धर्म विशेष के लोगों का ही हूजूम था।
मोदी की पटना रैली में मुस्लिम बड़ी संख्या में
क्या मोदी की पटना रैली में मुस्लिम बड़ी संख्या में आये थे? मुझे नहीं पता। पर यदि, हाँ तो उनकी तारीफ होनी ही चाहिए। और अगर नहीं तो यकीन मानिये ये हिंदूत्व राष्ट्रवादियों का जनसमुद्र ही था जिसने अपना धैर्य नहीं खोया। न तो भगदड़ मची और न ही हिंसा। अगर यकीन न हो तो तस्वीरें गवाह है कि इन हालात में तस्वीर का रूख क्या हो सकता है।
भीड़ पर विवाद
गाँधी मैदान में आयी भीड़ की संख्या पर विवाद तो स्वाभाविक है। यह तो हर पार्टी की रैली के बाद देखने-सुनने-पढ़ने को मिलता है। यह चरित्र है, यह अपने-अपने विचार है, और पक्ष या विपक्ष में होने का नजरिया है। यहाँ किसी मल्टीप्लेक्स में बिके टिकट की गिनती कर संख्या का दावा नहीं किया जा सकता। यह रैली या किसी भी भीड़ की प्रकृति होती है। लोग आते रहते हैं, निकलते रहते हैं। लेकिन मोटे तौर पर गांधी मैदान के केंद्र से 2 कि.मी. रेडियस में रैली के दिन (9 बजे से 3 बजे तक) लगभग 10 लाख लोगों की चहलकदमी थी।
अनर्गल बिषयों पर प्राईम टाईम
सोशल मीडिया में आतंकी हमले पर विश्लेषणों और प्रतिक्रिया का दौर जारी है। परंतु पहले दो दिन के बाद राजनीतिज्ञों और मुख्यधारा मीडिया ने मोर्चा संभाल लिया है और मूल मुद्दे से ध्यान भटकाया जा चुका है। कभी चिंतन शिविर तो कभी तीसरे मोर्चे की कुलबुलाहट। और फिर मोदीमय होती सारे दलों का विमर्श। फिर भी मेरे जुझारू सहयोगी मित्र ने बुधवार को दिल्ली में पत्रकारों के सवालों से बचते-बचते नीतिश कुमार से कुछ शब्द ले ही लिए। नीतिश ने जबाब में कह ही दिया कि (सूत्र-ईटीवी,बिहार) सरकार को सुरक्षा से क्या... यह पुलिस का मामला है वह समझेगी। और अगले सवाल पर आगे 2नवंबर को मोदी के दुबारा बिहार पदार्रपन की प्रतिक्रिया यूँ - "कोई आता जाता रहता है तो उससे मुझे क्या"!
एक दिलचस्प पहलू यह भी
राज्य के सिरमौर आप, राज्य के गृह-मंत्रालय की बागडोर आपके हाथों में फिर सुरक्षा के लिए सिर्फ डीजीपी और राज्य पुलिस जिम्मेदार!!! बिहार सरकार के राजनैतिक-प्रशासनिक पाखंड का यह खेल आने वाले दिनों में अत्यंत आश्चर्यजनक और दिलचस्प होगा। आश्चर्यजनक तब यदि डीजीपी साहब का प्रस्थान होता है। और दिलचस्प तब यदि वह अपने पद पर बने रहेंगे।
बिहार पुलिस के वर्तमान डीजीपी अभयानंद बिहार में छठ पूजा हादसा, फारबिसगंज पुलिसिया दमन कांड, मुखिया हत्याकांड के बाद राजधानी में उपद्रव, नवादा, मधुबनी में दंगा सहित अनेक बड़े मामलो को झेल चुके है, जिसमें लगभग 100 लोग मारे जा चुके हैं।। ऐसे में मात्र 6 मौतें और 83 घायल, क्या प्रभावित कर पायेगी हमारे राजनैतिक आकाओं को? संशय और आश्चर्यजनक। लेकिन यहाँ मामला मात्र 6 मौत और 83 घायल का नहीं है यहा प्रशन यह की 10 लाख लोगों की जान खतरे में थी। इतने पर भी सब मौन – वाकई दिलचस्प।
मझे मेरे कई शुभ चिंतक मित्रों ने कहा कि आप इस तेवर के आलेख लिखकर व्यक्तिगत खतरा तो मोल ले ही रहे हैं जो लाईक और शेयर कर रहे है उनके लिए भी खतरा कर रहे हैं। पहले तो इन मित्रों का शुक्रिया लेकिन अब तो व्यकित्गत किंकर्तव्यविमूढ़ता की हद हो गई। मै तो इसे मानसिक दिवालियेपन की अंतिम पायदान कहूँगा।
हुँकार, चीत्कार या अहंकार सबकी अपनी वाणी सबके अपने विचार हो सकते हैं। परंतु इतना तो तय है कि बिहार की शांत, अमनप्रिय, निर्दोष जनता पर हुए इस हमले से बिहार ने देश की भावी राजनीति की दहलीज पर दस्तक तो दे ही दी है। साथ ही यह आतंकी हमला कई राजनैतिक हस्तियों की कब्र की अंतिम कील साबित हो सकता है। इंतजार हम सबको है... पता नहीं भविष्य के गर्भ में क्या है।
Coming with next story...
हमले के बाद गिरफ्तार एक आतंकी ने पूछताछ में कूबूल किया कि वह एक स्थानीय जदयू नेता का भतीजा है। कुछ तेज तर्रार पत्रकार मित्रों ने इस खबर के सामने आते है खोजबीन शुरू कि और पाया की 29 अक्टूबर को वह राजगीर में जदयू के चिंतन शिविर में दिखा जहाँ धर्मनिरपेक्षता के सबसे बड़े कद के नेता नीतिश भी मौजूद थे। तस्वीरें भी सामने आयी। पटना के फ्रेजर रोड में इस चाचाजी का होटल है और हमले की सारी तैयारी और एक्सप्लोसिव तक यहीं इक्ट्ठा किये गये- यह खबरें NIA के की तहकीकात के बाद, आधिकारिक रूप से पुष्टि होने के बाद मीडिया में आई है। यह पुष्टि NIA की टीम ने की है किस धर्मनिरपेक्ष ताकत ने नही।.....
Amit Sinha is a bilingual journalist. He can be contacted at facebok.amit
खरी-खरी कहूँ तो मेरे तहकीकात के अनुसार मोदी की रैली में सीरीयल बम ब्लास्ट सिर्फ आतंकी हमला नहीं बल्कि एक सांप्रदायिक हमला है। साजिश है, क्योंकि वहाँ एक धर्म विशेष के लोगों का ही हूजूम था।
मोदी की पटना रैली में मुस्लिम बड़ी संख्या में
क्या मोदी की पटना रैली में मुस्लिम बड़ी संख्या में आये थे? मुझे नहीं पता। पर यदि, हाँ तो उनकी तारीफ होनी ही चाहिए। और अगर नहीं तो यकीन मानिये ये हिंदूत्व राष्ट्रवादियों का जनसमुद्र ही था जिसने अपना धैर्य नहीं खोया। न तो भगदड़ मची और न ही हिंसा। अगर यकीन न हो तो तस्वीरें गवाह है कि इन हालात में तस्वीर का रूख क्या हो सकता है।
गाँधी मैदान में आयी भीड़ की संख्या पर विवाद तो स्वाभाविक है। यह तो हर पार्टी की रैली के बाद देखने-सुनने-पढ़ने को मिलता है। यह चरित्र है, यह अपने-अपने विचार है, और पक्ष या विपक्ष में होने का नजरिया है। यहाँ किसी मल्टीप्लेक्स में बिके टिकट की गिनती कर संख्या का दावा नहीं किया जा सकता। यह रैली या किसी भी भीड़ की प्रकृति होती है। लोग आते रहते हैं, निकलते रहते हैं। लेकिन मोटे तौर पर गांधी मैदान के केंद्र से 2 कि.मी. रेडियस में रैली के दिन (9 बजे से 3 बजे तक) लगभग 10 लाख लोगों की चहलकदमी थी।
अनर्गल बिषयों पर प्राईम टाईम
सोशल मीडिया में आतंकी हमले पर विश्लेषणों और प्रतिक्रिया का दौर जारी है। परंतु पहले दो दिन के बाद राजनीतिज्ञों और मुख्यधारा मीडिया ने मोर्चा संभाल लिया है और मूल मुद्दे से ध्यान भटकाया जा चुका है। कभी चिंतन शिविर तो कभी तीसरे मोर्चे की कुलबुलाहट। और फिर मोदीमय होती सारे दलों का विमर्श। फिर भी मेरे जुझारू सहयोगी मित्र ने बुधवार को दिल्ली में पत्रकारों के सवालों से बचते-बचते नीतिश कुमार से कुछ शब्द ले ही लिए। नीतिश ने जबाब में कह ही दिया कि (सूत्र-ईटीवी,बिहार) सरकार को सुरक्षा से क्या... यह पुलिस का मामला है वह समझेगी। और अगले सवाल पर आगे 2नवंबर को मोदी के दुबारा बिहार पदार्रपन की प्रतिक्रिया यूँ - "कोई आता जाता रहता है तो उससे मुझे क्या"!
एक दिलचस्प पहलू यह भी
राज्य के सिरमौर आप, राज्य के गृह-मंत्रालय की बागडोर आपके हाथों में फिर सुरक्षा के लिए सिर्फ डीजीपी और राज्य पुलिस जिम्मेदार!!! बिहार सरकार के राजनैतिक-प्रशासनिक पाखंड का यह खेल आने वाले दिनों में अत्यंत आश्चर्यजनक और दिलचस्प होगा। आश्चर्यजनक तब यदि डीजीपी साहब का प्रस्थान होता है। और दिलचस्प तब यदि वह अपने पद पर बने रहेंगे।
बिहार पुलिस के वर्तमान डीजीपी अभयानंद बिहार में छठ पूजा हादसा, फारबिसगंज पुलिसिया दमन कांड, मुखिया हत्याकांड के बाद राजधानी में उपद्रव, नवादा, मधुबनी में दंगा सहित अनेक बड़े मामलो को झेल चुके है, जिसमें लगभग 100 लोग मारे जा चुके हैं।। ऐसे में मात्र 6 मौतें और 83 घायल, क्या प्रभावित कर पायेगी हमारे राजनैतिक आकाओं को? संशय और आश्चर्यजनक। लेकिन यहाँ मामला मात्र 6 मौत और 83 घायल का नहीं है यहा प्रशन यह की 10 लाख लोगों की जान खतरे में थी। इतने पर भी सब मौन – वाकई दिलचस्प।
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| फोटो- 27.10.2013, 11-26 am संयम से भाषण सुनता जनसैलाब |
मझे मेरे कई शुभ चिंतक मित्रों ने कहा कि आप इस तेवर के आलेख लिखकर व्यक्तिगत खतरा तो मोल ले ही रहे हैं जो लाईक और शेयर कर रहे है उनके लिए भी खतरा कर रहे हैं। पहले तो इन मित्रों का शुक्रिया लेकिन अब तो व्यकित्गत किंकर्तव्यविमूढ़ता की हद हो गई। मै तो इसे मानसिक दिवालियेपन की अंतिम पायदान कहूँगा।
Coming with next story...
हमले के बाद गिरफ्तार एक आतंकी ने पूछताछ में कूबूल किया कि वह एक स्थानीय जदयू नेता का भतीजा है। कुछ तेज तर्रार पत्रकार मित्रों ने इस खबर के सामने आते है खोजबीन शुरू कि और पाया की 29 अक्टूबर को वह राजगीर में जदयू के चिंतन शिविर में दिखा जहाँ धर्मनिरपेक्षता के सबसे बड़े कद के नेता नीतिश भी मौजूद थे। तस्वीरें भी सामने आयी। पटना के फ्रेजर रोड में इस चाचाजी का होटल है और हमले की सारी तैयारी और एक्सप्लोसिव तक यहीं इक्ट्ठा किये गये- यह खबरें NIA के की तहकीकात के बाद, आधिकारिक रूप से पुष्टि होने के बाद मीडिया में आई है। यह पुष्टि NIA की टीम ने की है किस धर्मनिरपेक्ष ताकत ने नही।.....
Amit Sinha is a bilingual journalist. He can be contacted at facebok.amit

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