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क्यूँ फाड़े भगत सिंह के पोस्टर

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बीते अगस्त के अंतिम सप्ताह में पटना एक अजीब हिंसक घटना की गवाह बनी। एक स्थानीय कालेज के समक्ष छात्रों का एक गुट इतना हिंसक हो गया कि उसने प्रदर्शन कर रहे दूसरे गुट के हाथों से शहीद भगत सिंह का पोस्टर छीन लिया और उसमें आग लगा दी। यह बेहद ही शर्मनाक घटना थी। इस घटना के विरोध में युवाओं के दूसरे गुट ने अगले दिन मोर्चा निकाला। यह गुट उसी कालेज के सामने पहुँच कर अपना शांतिपूर्ण विरोध प्रकट करना चाहता था। परंतु वैचारिक पक्षाघात से जूझता पटना प्रशासन पूरे मुद्दे को समझ ही नहीं सका। डीएसपी रैंक के एक पुलिस अफसर की हठधर्मिता के कारण पुलिसकर्मियों ने इस निहत्थी भीड़ पर क्रूरतम लाठीचार्ज कर दिया। इसके बाद भी उन्हें थाने ले जाकर प्रताड़ित किया गया। परंतु सरकार सोती रही और पूरे मामले पर प्रतिक्रिया तक नहीं दी।

अखाड़े बनते हमारे विश्र्वविधालय
उपरोक्त घटना की आँच अभी ठंडी भी नहीं हुई थी की बीते 21 सितंबर को पटना विश्र्वविधालय प्रांगण बम विस्फोटों से दहल उठा। यहाँ हर दूसरे दिन ऐसी हिंसक घटनाएं होती है और ये खबरें अखबार की सुर्खियाँ बन जाती हैं। विश्र्वविधालय प्रशासन भी समस्याओं की जड़ में पहुँचने की बजाये फौरी तौर पर घटनाओं से अपना पीछा छुड़ाना चाहता है, और शायद इसलिए ये हालात सुधरते ही नही। फिर यह बहुत निराशाजनक है कि स्थानीय पुलिस और कालेज प्रशासन ऐसी हर दूसरी घटना के बाद छात्रावास खाली करने का फरमान सुना डालते हैं। ऐसे फैसलों से छात्रों को तकलीफ होती है। उन्हें आपे-धापे निजी छात्रावास और लाज मे शरण लेनी पड़ती है। फिर ज्यादार छात्र जो इसे अफोर्ड नहीं कर पाते उनकी स्थिति तो अत्यंत पीड़ादायी होती है।

प्रजातंत्र मे कितना जरूरी है आक्रोश?
चेतना, तेवर, आक्रोश और विरोध एक स्वस्थ लोकतंत्र के जरूरी स्तंभ हैं। परंतु विरोध की शैली मर्यादित और स्वनुशासित हो तब ही उसे जनसमर्थन भी मिलता है। पूँजीवाद के साइड इफेक्ट के रूप में हमें भ्रष्टाचार का भयावह रूप देखने को मिल रहा है। इसी कारण हमारे सरकारी स्कूल, कालेज और विश्वविधालयों को अभूतपूर्व चुनौती मिल रही है। हमारे छात्रावासों की स्थिति खराब है और बिल्डिंग्स जीर्ण-शीर्ण हैं। मूलभूत सुविधाओं का तक का अभाव है। परंतु क्या हिंसा कर, सड़क जाम कर, अराजकता फैलाकर हम इस भ्रष्टाचार और उसके पोषक पूँजीवाद के विरोध को अंजाम दे पायेंगे?

रोल माडल भगत सिंह
दरअसल, रोल माडल को तरसती हमारी युवा पीढ़ी पूरी तरह जागरूक नहीं दिखती। वीर, शहीद और महान लोगों के आदर्श, उनके विचारों और संवादो से महरूम है यह पीढ़ी। जिन शहीद भगत सिंह को लेकर पटना की सड़कों पर इतनी जद्दोजहद हुई वे एक क्रांतिकारी थे। फिर भी उन्होने अपनी हर बात मनवाने के लिए हिंसा का सहारा नहीं लिया। आज की इस युवा पीढ़ी को मालूम हो कि जेल में भगत सिंह व उनके साथियों ने 64 दिनों तक भूख हड़ताल की। उनके एक साथी यतीन्द्रनाथ दास ने तो भूख हड़ताल में अपने प्राण ही त्याग दिए थे। शहीद भगत सिंह नें मात्र 23 वर्ष की छोटी-सी आयु में फ्रांस, आयरलैंड और रूस की क्रांति का विषद अध्ययन किया था। भगत सिंह क्रांतिकारी देशभक्त ही नहीं बल्कि एक अध्ययनशीरल विचारक, कलम के धनी, दार्शनिक, चिंतक, लेखक, पत्रकार और महान मनुष्य थे। ऐसा भी नहीं है की वे मनोरंजन नहीं करते थे। फिल्में देखना उन्हे अत्यधिक पसंद था। वे राजगुरु और यशपाल के साथ जब भी मौका मिलता था, फिल्म देखने चले जाते थे। चार्ली चैप्लिन की फिल्में बहुत पसंद थीं। हिन्दी, उर्दू, अंग्रेजी, संस्कृत, पंजाबी, बंगला और आयरिश भाषा के मर्मज्ञ चिंतक और विचारक भगतसिंह भारत में समाजवाद के पहले व्याख्याता थे। भगत सिंह अच्छे वक्ता, पाठक और लेखक भी थे। उन्होंने 'अकाली' और 'कीर्ति' दो अखबारों का संपादन भी किया।

युवाओं में जागरूकता जरूरी
हमें और हमारी युवा पीढ़ी के लिए सर्वप्रथम यह जानना जरूरी है कि जागरुकता आखिर है क्या? किसी चीज के लिए जागरूक होने का मतलब है आपके लिए उस चीज का वजूद होना। मान लेते हैं कि यहां बस एक ही लाइट जल रही है और हमने लाइट की वोल्टेज कम कर दी। हम मुश्किल से थोड़ा देख पा रहे हैं। अगर आप वोल्टेज बढ़ा दें, तो आपको अचानक ज्यादा दिखने लगेगा, क्योंकि रोशनी फैल चुकी होगी। जागरूक होना ठीक वैसा ही है। आप वोल्टेज बढ़ा दीजिए तो अचानक आप ऐसी बहुत-सी चीजें देखने लग जाएंगे, जो अब तक आपकी अनुभूति के दायरे में थीं ही नहीं। यही स्थिति आज के युवाओं की है। वे अभी अपने मोबाईल, टेबलेट और फेसबुक, ट्वीटर की दुनिया तक ही सीमित है। वे अपनी जिंदगी के एक छोटे-से हिस्से को ले कर ही जागरूक हैं। कालेजों में आए दिन मार-पीट, हास्टल में अराजकता, अच्छे विधार्थियों की रैगिंग, छेड़छाड़ की घटनाएँ इनकी मनोदशा और जागरूकता की सीमित परिस्थितयों का प्रतिबिंब है।
Amit Sinha is a bilingual Columnist. He can be contacted at facebook.amit