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पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल के असिस्टेंट मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डा. विमल कारक ने के अनुसार कि धमाकों में पांच लोगों की मौते हुई हैं। सरकार के हवाले से भी इन मौतों की पुष्टि हुई है। कुल 70 लोगों को पटना के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पीएमसीएच में भर्ती कराया गया था, जिनकी संख्या बाद में बढ़कर 83 हो गई थी। हालांकि लगभग दो दर्जन लोगों को मामूली चोटें थी जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद घर जाने दिया गया।
बेहतर प्लानिंग कर किया विस्फोट
मोदी के पटना लैंड करने के पहले ही 10 बजे सुबह पहला धमाका पटना जंक्शन पर हुआ। मगर पटना प्रशासन इस संकेत को न समझ सका। 11 बजे तक प्रशासन के उच्चाधिकारी पटना एसएसपी, एसपी, रेल एसपी समेत आधे दर्जन डीएसपी वहीं दिखे। लगातार एक घंटे में मोदी के मंच के करीब ये धमाके होते रहे और पुलिस बेबस दिखी। इस दौरान 5 लोग गाँधी मैदान के अलग-अलग छोर पर विस्फोट में मरे और घायल होते रहे। सरकारी एंबुलेंस 108 की भारी कमी थी और प्राईवेट नर्सिंग होम के एंबुलेंस को बुलाया जाने लगा।
गांधी मैदान(उतरी), दृश्य -1
बस ज्योंही घड़ी की सुई 12 पर गई नरेंद्र मोदी के मंच के कुछ ही दूर पुलिस मुख्यालय के ठीक सामने गाँधी मैदान के अंदर का पहला विस्फोट( दिन का दूसरा) हुआ। इस समय रैली को भाजपा के स्थानीय नेता संबोधित कर रहे थे और लगभग 5,00,000(पांच लाख) की भीड़ वहाँ थी। अभी पटना जंक्शन से पुलिस महकमा लौट ही रहा था की इस खबर ने उसकी नींद उड़ा दी। आनन-फानन में सिटी एसपी जयंतकांत ने मोर्चा संभाला, पर ज्योंही बम स्कवाड के साथ उन्होने गांधी मैदान के उतरी छोर से प्रवेश किया लगातार तीन बम मैदान के अलग-अलग छोर फूटे। इससे भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई और एसपी साहब अपने कारिंदो के साथ एक जगह रूक गये। 5-6 हजार की भीड़ ने उन्हें घेर लिया और वे बड़ी मुशिकल से वहाँ से निकल पाये।
गांधी मैदान(दक्षिणी), दृश्य -2
पुरानी गांधी मुर्ति के अंदर सबसे ताकतवर विस्फोट हुआ। दो व्यकित् वहीं मारे गये। पाँच मिनट तक लोग समझ ही नहीं पा रहे थे। जैसे ही पूरा माजरा समझ में आया भगदड़ मच गयी। लोग रामगुलाम चौक(एक्जीवीशन रोड) की तरफ वाले गेट से भागने लगे। परंतु गेट संकरा होने से लोग फँस गये। एसएसपी जैसे ही वहाँ से खून से लथपथ घायल को लेकर निकलने लगे, लोग आक्रोशित हो गए और पुलिस पर हमला करने की भी कोशिस की।
मोदी ने दिया धैर्य का परिचय
धमाकों के बाद रैली में अफ़रा तफ़री फैली लेकिन नरेंद्र मोदी ने तयशुदा कार्यक्रम के तहत भाषण दिया। भाषण के पहले आधे घंटे में मोदी ने धमाकों का ज़िक्र तक नहीं किया। सिर्फ अंत में उन्होंने कहा कि सब शांति से घर जाएँ और सुरक्षित रहें। भाषण के बाद नरेंद्र मोदी ने ट्वीच किया कि, "पटना में हुए धमाके बेहद दुखदायी और दुर्भाग्यपूर्ण हैं. मृतकों के परिवारों के साथ हमारी सहानुभूति है. मैं सबसे शांति की अपील करता हूँ।" हुंकार रैली में मोदी ने कहा कि लोकतंत्र के सबसे बड़े दुश्मन परिवारवाद, जातिवाद, संप्रदायवाद और अवसरवाद हैं और बिहार में ये चारों चीज़ें उभरकर आई हैं.
क्या कहा मुख्यमंत्री ने
पुरी घटना से सवालों के घेरे में आये मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घायलों को पाँच लाख मुआवजे की घोषणा की है। धमाकों के दो बाद पत्रकारों से बातचीत में नीतीश कुमार ने कहा, "पुलिस मामले की जाँच कर रही है. हम कोई कसर नहीं छोड़ेगें. लेकिन ऐसा लगता है कि बिहार के माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। ख़ासकर ऐसी तारीख़ पर तब जब पटना में एक बड़ी रैली होनी थी. ये चिंता का विषय है कि बिहार में ऐसा हुआ।
मुख्यमंत्री का कहना था, "जब पहला धमाका हुआ था तो एक व्यक्ति को भागते हुए देखा गया था जिसे पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। उनके पास से कुछ सुराग मिले हैं, कुछ टेलीफोन नंबर भी मिले हैं। रैली से एक दिन पहले एक सूटकेस गांधी मैदान से मिला था लेकिन उसमें कुछ भी नहीं मिला था।"
नीतीश कुमार ने कहा कि ऐसी घटना देश के माहौल को बिगाड़ने की कोशिश हो सकती है, इसलिए सबको एक जुट होकर रहना चाहिए।
Amit sinha is a bilingual journalist. He can be contacted at facebook.amit.
बेहतर प्लानिंग कर किया विस्फोट
मोदी के पटना लैंड करने के पहले ही 10 बजे सुबह पहला धमाका पटना जंक्शन पर हुआ। मगर पटना प्रशासन इस संकेत को न समझ सका। 11 बजे तक प्रशासन के उच्चाधिकारी पटना एसएसपी, एसपी, रेल एसपी समेत आधे दर्जन डीएसपी वहीं दिखे। लगातार एक घंटे में मोदी के मंच के करीब ये धमाके होते रहे और पुलिस बेबस दिखी। इस दौरान 5 लोग गाँधी मैदान के अलग-अलग छोर पर विस्फोट में मरे और घायल होते रहे। सरकारी एंबुलेंस 108 की भारी कमी थी और प्राईवेट नर्सिंग होम के एंबुलेंस को बुलाया जाने लगा।गांधी मैदान(उतरी), दृश्य -1
बस ज्योंही घड़ी की सुई 12 पर गई नरेंद्र मोदी के मंच के कुछ ही दूर पुलिस मुख्यालय के ठीक सामने गाँधी मैदान के अंदर का पहला विस्फोट( दिन का दूसरा) हुआ। इस समय रैली को भाजपा के स्थानीय नेता संबोधित कर रहे थे और लगभग 5,00,000(पांच लाख) की भीड़ वहाँ थी। अभी पटना जंक्शन से पुलिस महकमा लौट ही रहा था की इस खबर ने उसकी नींद उड़ा दी। आनन-फानन में सिटी एसपी जयंतकांत ने मोर्चा संभाला, पर ज्योंही बम स्कवाड के साथ उन्होने गांधी मैदान के उतरी छोर से प्रवेश किया लगातार तीन बम मैदान के अलग-अलग छोर फूटे। इससे भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई और एसपी साहब अपने कारिंदो के साथ एक जगह रूक गये। 5-6 हजार की भीड़ ने उन्हें घेर लिया और वे बड़ी मुशिकल से वहाँ से निकल पाये।
गांधी मैदान(दक्षिणी), दृश्य -2
पुरानी गांधी मुर्ति के अंदर सबसे ताकतवर विस्फोट हुआ। दो व्यकित् वहीं मारे गये। पाँच मिनट तक लोग समझ ही नहीं पा रहे थे। जैसे ही पूरा माजरा समझ में आया भगदड़ मच गयी। लोग रामगुलाम चौक(एक्जीवीशन रोड) की तरफ वाले गेट से भागने लगे। परंतु गेट संकरा होने से लोग फँस गये। एसएसपी जैसे ही वहाँ से खून से लथपथ घायल को लेकर निकलने लगे, लोग आक्रोशित हो गए और पुलिस पर हमला करने की भी कोशिस की।
मोदी ने दिया धैर्य का परिचय
धमाकों के बाद रैली में अफ़रा तफ़री फैली लेकिन नरेंद्र मोदी ने तयशुदा कार्यक्रम के तहत भाषण दिया। भाषण के पहले आधे घंटे में मोदी ने धमाकों का ज़िक्र तक नहीं किया। सिर्फ अंत में उन्होंने कहा कि सब शांति से घर जाएँ और सुरक्षित रहें। भाषण के बाद नरेंद्र मोदी ने ट्वीच किया कि, "पटना में हुए धमाके बेहद दुखदायी और दुर्भाग्यपूर्ण हैं. मृतकों के परिवारों के साथ हमारी सहानुभूति है. मैं सबसे शांति की अपील करता हूँ।" हुंकार रैली में मोदी ने कहा कि लोकतंत्र के सबसे बड़े दुश्मन परिवारवाद, जातिवाद, संप्रदायवाद और अवसरवाद हैं और बिहार में ये चारों चीज़ें उभरकर आई हैं.
क्या कहा मुख्यमंत्री ने
पुरी घटना से सवालों के घेरे में आये मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घायलों को पाँच लाख मुआवजे की घोषणा की है। धमाकों के दो बाद पत्रकारों से बातचीत में नीतीश कुमार ने कहा, "पुलिस मामले की जाँच कर रही है. हम कोई कसर नहीं छोड़ेगें. लेकिन ऐसा लगता है कि बिहार के माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। ख़ासकर ऐसी तारीख़ पर तब जब पटना में एक बड़ी रैली होनी थी. ये चिंता का विषय है कि बिहार में ऐसा हुआ।
मुख्यमंत्री का कहना था, "जब पहला धमाका हुआ था तो एक व्यक्ति को भागते हुए देखा गया था जिसे पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। उनके पास से कुछ सुराग मिले हैं, कुछ टेलीफोन नंबर भी मिले हैं। रैली से एक दिन पहले एक सूटकेस गांधी मैदान से मिला था लेकिन उसमें कुछ भी नहीं मिला था।"
नीतीश कुमार ने कहा कि ऐसी घटना देश के माहौल को बिगाड़ने की कोशिश हो सकती है, इसलिए सबको एक जुट होकर रहना चाहिए।
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