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नीतिश ने किया सिख धर्म का अपमान, सिखों में आक्रोश

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बात-बात पर मुस्लिम समुदाय की धार्मिक आस्था की प्रतीक जालीदार टोपी पहनने वाले नीतिश कुमार ने गुरूवार को पटना साहिब गुरुद्वारे में अपना सिर ढकने से साफ इनकार कर दिया, जिससे नया विवाद पैदा हो गया है। 'सेकूलर' को अपने ही परिभाषा में पिरोते नीतिश कुमार के लिए सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करना आनेवाले दिनों में उनके लिए सिरदर्द साबित हो सकता है।
दरअसल, गुरुवार को नीतीश पटना सिटी स्थित प्रसिद्ध गुरुद्वारा गए थे, जहां उन्हें नए रेस्ट हाउस का उद्घाटन करना था. गुरुद्वारा कमेटी के मुताबिक, परिसर में घुसते वक्त जब नीतीश को सिर ढकने के लिए कहा गया, तो उन्होंने इससे साफ इंकार कर दिया।
इतना ही नहीं, नीतीश ने सिर न ढकने का जो बहाना बनाया, वह और भी बेतुका है। उन्होंने कहा कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है। सीएम कुछ मिनट तक गुरुद्वारे में रुके। इस दौरान उनका सिर पूरी तरह खुला ही था। नीतीश के वहां से चले जाने के बाद गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी ने विरोध जताया। मैनेजमेंट ने कहा कि सीएम ने सिख समुदाय के प्रति असम्मान दिखाया है, जो सिख धर्म की भावनाओं से खिलवाड़ है। 

हालांकि मौके पर उपस्थित सिखों की ओर से तुरंत विरोध नहीं किये जाने को लेकर सिख अनुयायियों में काफी रोष है। कई सिख परिवारों ने इसे सिख धर्म का सार्वजनिक अपमान बताया और कहा कि कुछ चाटुकारों की वजह से नीतिश कुमार को गुरूद्धारे में प्रवेश करने दिया गया अन्यथा उनका धर्म कतई इस बात की इजाजत नहीं देता। कई संगतों ने पूरे मामले पर आनेवाले दिनों में विरोध की बात कही है। 

मालूम हो कि दो बर्ष पहले 29 दिसंबर 2011 को बाल लीला गुरूद्धारा के परिसर में 109 डीलक्स कमरे के अत्याधुनिक धर्मशाला 'राजमाता विश्वाभरा देवी यात्री निवास' का उद्घाटन हुआ था। बिहार के तत्कालीन उप-मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने उद्धघाट्न किया था। उन्होने विधिवत सिर को ढ़कने के बाद ही गुरूद्धारा परिसर में प्रवेश किया था। और पूरे कार्यक्रम के दौरान उन्होने इसे धारण किये रखा। इसके बाद उन्होने आम जनता की तरह लंगर में अन्य अनुयायियों के साथ लंगर भी खाया था। 

हर धर्म में उसके धर्मस्थलों/पूजास्थलों के निश्चित नियम और कायदे होते हैं, जिसका पालन करना सबके लिए एकसमान जरूरी होता है। जो भी व्यक्ति इन नियमों में यकीन करता है उसे ही अंदर जाने अनुमति मिलती है। सिर्फ इस्लाम धर्म में किसी अन्य धर्म के प्रति श्रद्धा प्रतिबंधित है इसलिए इस्लाम के अनुयायी दूसरे धर्म के धार्मिक नियमों का अनुसरण नहीं कर सकते हैं। अब पता नहीं क्यूँ नीतिश कुमार इन नियमों को नियमतः व्यावहारिक जीवन में उतार रहें है? परंतु एक प्रबुद्ध नीतिश कुमार से ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती की उन्हें नियमों का पता न हो, और फिर यहां तो मामला अनभिज्ञता का नहीं इंकार का है।
Amit Sinha is a bilingual Columnist. He can be contacted at facebook.amit