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याद है बिहार की सड़कों पर ईडेन की एसी बसों का रोमांच!

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बर्ष 2011 में धूमधाम से बिहार की सड़कों पर सैकड़ों बसों की फ्लीट लेकर उतरी निजी बस कंपनी ईडेन ट्रांसपोर्ट ने अपनी कई सेवा बंद कर दी है। रिंग रूट बसों के संचालन को लेकर उपजे विवाद में इडेन ने यह कदम उठाया है। कंपनी की अंर्तजिला एसी बस सेवायें कई महीनों से बंद हैं। कंपनी ने राज्य में सड़कों की बुरी हालत को इसके लिए जिम्मेदार बताया। ईडेन कंपनी के सेवा केंद्र के पुनीत शर्मा बताते हैं की ज्यादातर रूटों पर ईडेन ने एसी बस सेवा बंद कर दी है। क्योंकि इन एसी बसों की रोड क्लीयरेंस कम होती है और बिहार में कहीं भी सड़कें ऐसी नहीं हैं कि वे ठीक से चल पायें। आगे वे कहते हैं कि हमारी कई बसों का चैंबर खराब सड़को की वजह से फट चुका है और भारी नुकसान के कारण कई बसें बंद पड़ी है।


ईडेन के एक दूसरे अधिकारी बताते हैं कि हमारी बसों में जबर्दस्ती रंगदार किस्म के लोग घुस जाते हैं और मनचाहे सीट पर बैठते-बिठाते हैं। मना करने पर स्टाफ और ड्राईवर से मार-पीट करते है। और इन सब में अन्य निजी बस संचालक और उनके गुर्गे भी ऐसे गलत लोगों का साथ देते हैं। इस कारण हमने(ईडेन ने) आरक्षण की सुविधा ही खत्म कर दी है। पहले यह सेवा बेबसाईट पर भी उपलब्ध थी। परंतु जो यात्री सुखद यात्रा की आश में दिल्ली, मुंबई सहित देश के बाहर से भी हमारे वेबसाईट पर आरक्षण कराते थे उन्हें यात्रा के दिन निराश होना पड़ता था और हमारी फजीहत हो जाती थी। स्थानीय प्रशासन इसे निजी मामला बताकर कोई मदद नहीं करता। इसकी शिकायत उपर तक की गई परंतु नतीजा शिफर ही रहा। 

सूत्रों के अनुसार पूरी साजिश अन्य प्राईवेट बस मालिकों और BSRTC के अधिकारियों की ओर से की गई है। कम दर पर बेहतर माहौल और सेवा देकर ईडेन चंद महीनों में ही यात्रियों की चहेती बन गई। आरक्षण की सुविधा और वेबसाईट बुकिंग जैसी सुविधा देकर ईडेन ने बिहार में बस सेवा की नई तस्वीर पेश की। चूँकि बिहार में बसों के संचालन में अपराधी और राजनीतिक लोगों की ही पैठ रही है इसी कारण प्रतिद्धंधिता में पिछड़े अन्य बस संचालक मार-पीट पर उतर आये। बस स्टैंड़ो पर भी ईडेन की बसों को स्थानीय गुर्गों द्धारा विभिन्न तरीकों से परेशान किया जाने लगा। कई बार प्रशासन से शिकायत की गई परंतु पुलिस ने निजी स्वार्थवश अपराधी-राजनीतिक पैठ को ही संरक्षण देती है। 


BSRTC का 5 करोड़ ईडेन पर बकाया, तो ईडेन का सरकार पर 8.9 करोड़ बकाया 
बेहतर यात्री सेवा को लेकर बर्ष 2011 में शुरू की गई राज्य सरकार की इस कवायद का सबने स्वागत किया। राज्य सरकार की ओर से BSRTC और ईडेन ट्रांसपोर्ट प्राईवेट लिमिटेड के बीच कई करार हुए। शर्तों के अनुसार बसों का संचालन ईडेन को ही करना था जिसके लिए सरकार उसे सब्सीडी देती और ईडेन बतौर टैक्स सरकार को एक तय मुश्त रकम चुकाती। 

निर्धारित रूट पर लागू अधिकतम किराये को बस में उपलब्ध सीटों की कुल संख्या के 11 प्रतिशत से गुणा करने पर जो संख्या प्राप्त होती है वह अधिभार था। यह वह संख्या थी जो ईडेन टैक्स के रूप में सरकार को चुकाती। परंतु BSRTC के अधिकारियों ने इसमें बसों की फ्रीकवेंसी को भी जोड़ दिया। यह करार के खिलाफ था और कहीं न कहीं ईडेन को परेशान करने की साजिश थी। ईडेन के औनर सह मैनेजिंग डायरेक्टर सच्चिदानंद राय अधिकारियों से लेकर मंत्री तक पूरे मामले को पहुँचाते रहे परंतु नतीजा शिफर। 

दोनो पक्षों के बीच हुए करार के अनुसार बिहार सरकार की संस्था BSRTC हर बस संचालन के लिए ईडेन कंपनी को 7.5 लाख रूपये प्रतिबर्ष देना है। इसी प्रकार अंर्तजिला सर्विस के लिए भी ईडेन को 5 लाख रूपये प्रति बस प्रति बर्ष की दर से बतौर सब्सिडी मिलनी थी। 15 मई 2011 को हुए करार के विपरीत BSRTC ने सब्सीडी देने के वक्त से टाल-मटोल की नीति अपनाई। जबकि ईडेन ने आर्थिक संकट के बाबजूद बसों का परिचालन करने की कोशिस की। मालूम हो की 14 मार्च 2011 को दोनों पक्षों के बीच पटना में स्थानीय रूटों पर 8 एसी बसों समेत कुल 78 बसों के परिचालन का अनुबंध हुआ था। ऐसा ही एक करार जनवरी 2011 में पटना-छपरा रूट पर 40 बसों के परिचालन को लेकर किया गया। 

इस प्रकार 2011 तक ईडेन और सरकार के बीच कई करार हुए, बसें चलनी शुरू हुई, सरकार के मुखिया और अन्य मंत्री बस फ्लीट्स को हरी झंडी दिखाते अखबारों के मुख्य पृष्ठों पर छा गये। परंतु जिस तरह से ईडेन को बिहार में परेशान किया गया है यह बिहार के भावी निवेशकों के लिए शुभ संदेश नही है। हर बर्ष राजधानी के बड़े होटलों में ग्लोबल बिहार समिट, इंवेस्टर्श मीट और चिंतन-मनन पर करोड़ो रुपये लुटाकर अखबारों की सुर्खियाँ तो बटोर ली जाती हैं परंतु इन समस्याओं से मुँह चुराकर "हूजूर" आप बिहार में निवेशक बुला नही रहे ब्लकि बिहार से निवेशक भगा रहे हैं।
Amit Sinha is a bilingual journalist. You can join him on facebook.amit.