पटना 8 अक्टूबर। आज बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी अधिकार यात्रा लेकर जुमई जिले में थे। अधिकार यात्रा के पहले चरण में बेगूसराय, खग़डिया और लगभग प्रत्येक जिले में मुख्यमंत्री का पुरजोर विरोध हुआ- मंच पर अंडे चले और मुख्यमंत्री को जूते चप्पल दिखाये गए। काले झंडे दिखानेवालों ने तो उनके कारकेकड को भी नहीं बख्शा। अब तो लाल कपड़ा और सांढ़ के संबध को काला कपड़ा और नीतीश के समानांतर बताया जा रहा है। विरोध प्रदर्शनों से विचलित मुख्यमंत्री की ओर से समूचे बिहार प्रशासन को एक तुगलकी फरमान जारी हुआ है।
उनकी सभा में काला झंड़ा, काला कपड़ा, काला टी-शर्ट, काली साड़ी पहन कर आने की अनुमति नहीं है, और ऐसे लोगों पर धारा 107 लगाकर जेल भेजा जा रहा है। हद तो तब हो गई जब काला छाता लिए कुछ लोगों को आज(सोमवार) को कार्यक्रम क्षेत्र से 2 किलोमीटर पहले ही रोक दिया गया। हालांकि प्रशासन इस बात से लगातार इंकार कर रहा है।
जुमई प्रशासन की तरफ से मुख्यमंत्री के लिए अभूतपुर्व सुरक्षा के इंतजाम किये गयो थे। अब गया जिले की बारी है और यहां के विधायक को सोमवार की सुबह से नजरबंद कर दिया गया है। कारण, यह है कि विधायक जी शिक्षक संघ के अगुआ हैं, और आज के लोकतांत्रिक बिहार में आप विरोध करने की अनुमति किसी को नहीं है। गया कि जिलाधिकारी वंदना प्रेयसी इस मुद्दे पर मीडिया से कतराती रहीं। अब यदि आपको बिहार में रहना है तो आपको सुशाशन सरकार का तुगलकी फरमान तो मानना होगा वरना आप तय मानिये की आप जेल भेजे जाएंगे। विरोध और अनुरोध को लोकतांत्रिक दायरे मे रखने कि नसीहत देने वाले सुशासन बाबू कहीं जल्द ही काला बाल वाले को भी जेल भेजने का आदेश न दे दें। फिर तो बिहार मे सात सालों के विकास का सफर भूरा बाल से लेकर काले के बीच ही रह जायेगा।

