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Developing Bihar:A Reality Check

जहाँ बिहार के विकास की चर्चा हर ओर हो रही थी वहीं नीतिश कुमार के अधिकार यात्रा के दौरान हुए विरोध के व्यापक सिलसिले ने उस बिखरते हुए आभामंडल को सामने ला खड़ा किया। हालांकि इसपर पक्ष और विपक्ष के अपने तर्क हैं परंतु नीतिश पर मीडीया को ब्लैकआउट करने के आरोपों को निराधार नहीं कहा जा सकता।उन समाचारों और तस्वीरों को जगह नहीं मिल रही है जो सरकार को सच्चाई दिखाने की हिम्मत करतें हैं। खैर जमीनी हकीकत से रूबरू कराने का एक प्रयास है यह तस्वीर। निशचित तौर से मेरी ली हुई दूसरी तस्वीर नहीं छापी जाएगी।

नीचे की तस्वीर में उसी नवनिर्मित थाना के सामने की हैं(तस्वीर से स्पष्ट है), जहां 70 प्रतिशत सड़क अतिक्रमण का शिकार है। सैंकड़ो सड़ती गाडियों के बीच (पुराने कबाड़ कार मे आराम करता सूअर)एक विकसित राज्य की राजधानी की कुव्यवस्था को प्रतिबिंबित कर रहा है। और जिला प्रशासन की अकर्मणयता का आलम यह है कि उद्घाट्न के दिन भी हालात जस के तस रहे। सुशासन बाबू आये..उद्घाट्न किया..फोटो खिंचाई और चल दिये। अब मुख्यमंत्री को कुछ दिखता ही नहीं है और मीडिया अगर दिखाने की हिम्मत करे तो ब्लैकआउट की धमकी। पत्रकार अपनी नौकरी बचाये या भूखे रह कर प्रशासन से पंगा ले??