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Changing Sex Scenario In India


The article originally appeared on pratyek, Hindi Weekly on April 16,2013
पटना में बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में तैनातडिप्टी कलेक्टर अखिलेश कुमार की बेटी शुभ्रा(काल्पनिक नाम) ने अपने पिता (अखिलेश कुमार) पर बलात्कार का आरोप लगाया है। बीते शुक्रवार(12-04-2013) को पटना के महिला थाना में अपने ही पिता के खिलाफ बलात्कार का केस दर्ज कराते हुए युवती ने घर के नौकर विकास कुमार(अरवल निवासी) को भी प्राथमिकी में नामजद किया है।
राजधानी के नामी स्कूल की 7वीं की इस छात्रा ने पूरे मामले में आरोप लगाते हुए पुलिस को बताया कि पिछले तीन महीने से उसके पिता जर्बदस्ती उसका यौन शोषण करते रहें है। शुक्रवार की सुबह उसके पिता ने 6वीं बार उसका रेप किया और उसकी माँ के हौसले दिलाने पर ही वह शिकायत करने की हिमम्त जुटा सकी। लड़की ने यह भी बताया कि उसके पिता घर पर ही प्रौस्टीच्यूटस को लाते थे और गंदे काम करते थे, परंतु उसने हमें इतना डरा दिया था कि हम कुछ भी नहीं कर पा रहे थे।
पुलिसिया अनुसंधान में सभी बातों कि पुष्टि हुई है और पता चला है कि अखिलेश कुमार की अपनी पत्नी से रिश्ते अच्छे नहीं थे। पड़ोसियों के अनुसार अखिलेश के फ्लैट पर अक्सर अंजान लडकियाँ आती रहती थी। अनुसंधान के दौरान पुलिस को अखिलेश के लैपटाप और मोबाईल पर दर्जनों युवतियों के फोटो और नंबर मिले हैं जिसपर अनुसंधान जारी है।
टूटती रही मर्यादायें, बनती रही सुर्खियाँ
बीते सप्ताह राजधानी पटना से विचित्र खबरें आयीं। ऐसी खबरें जो मन-मस्तिष्क को निचोड़ गई। सेक्स और शारीरिक संबधो को लेकर सारी मान्यताएँ टूटती दिखीं। पटना की उपरोक्त घटना ने तो हिला कर रख ही दिया परंतु दूसरी घटनाओं ने भी राजधानी के घरों की चारदिवारी में भी दरिंदो के उपस्थिति दर्ज करा दी।
पटना के कंकड़बाग क्षेत्र के एक युवक ने अपनी हवस मिटाने के लिए अपने किरायेदार की 9बर्षीय छोटी बच्ची से बलात्कार किया। पाटलिपुत्रा थाना के सदाकत आश्रम के पीछे एक साईको किलर ने सोनू(12 साल) नाम के बच्चे के साथ अप्राकृतिक यौनाचार किया और तत्पश्चात् उसकी हत्या कर दी।
नैतिक पतन या मानसिक विकृति
बात सिर्फ बलात्कार पर रूके तो समझ में आता है परंतु जिस तरह की सेक्सुअल विकृतियाँ सामने आ रही है वह खतरनाक है। पिछले 3-4 बर्षों में ऐसे दर्जनों मामले सामने आये हैं जो शोध का विषय है। क्लीनीकल दृष्टिकोण से देखें तो सेक्स के प्रति अपूर्ण चाहत, सेक्स का अतिरेक और सेक्स की ऐक्यूट चाहत कुछ और नहीं बल्कि एक तरह की बिमारी है जिसे सेक्स पाराफिलिया कहते हैं।
हालात यह है कि पिता द्धारा पुत्री का, चाचा द्धारा भतीजी का, ससुर द्धारा बहू का, मामा द्धारा भाँजी के बलात्कार की खबरें धीरे-धीरे आम होती जा रही है। सामाजिक तौर पर इन रिशतों को सबसे कलंकित माना जाना स्वागत योग्य है परंतु हमें यह भी मानना होगा कि ये घटनायें हमारे बीच की ही है। पटना के डा. मनोरंजन प्रसाद के अनुसार ये सभी मनोविकार का प्रतिफल है। मनोविज्ञान के शोधकर्ता मानते हैं कि आजकल सड़क पार करते वक्त भी नवयुवक अपने स्मार्ट फोन पर वीडियो स्ट्रीमिंग हास्ट, YouTube आदि पर पौर्न विडियो का मजा लेते दिख जायेंगे। लगातार गीत-संगीत सुनना या पौर्न देखने से उनकी खराब मनोवृति और भी खराब हो जाती है, जिसे हम मनोविकृति कहते हैं। ऐसे लोग जब महिलाओं से मिलेंगे तो उनकी आँखे वक्षों और उभारों को टटोलने लगती है। महिलाओं को ऐसे पुरूषों से सतर्क रहना चाहिए।
समस्तीपुर में सास ने की दामाद से शादी
इसी फरवरी में बिहार के समस्तीपुर जिले से हतप्रभ कर देने वाली घटना सामने आयी। य़हां 8बच्चों की एक अधेड़ मां ने अपनी एक शादी-शुदा बेटी का घर ही उजाड़ दिया। महीनों तक उसने अपने दामाद से शारीरिक संबंध बनाये। इसके बाद भी मन नहीं भरा तो खुलेआम शादी रचाकर रिश्ते की मर्यादा को तार-तार कर दिया।
हुआ यूँ कि, समस्तीपुर के मल्हीपुर निवासी अशोक कुमार यादव की शादी दो साल पहले बेगूसराय के डुमरी गांव निवासी गंगो देवी की पहली बेटी के साथ हुई थी। शादी के बाद दामाद, पुत्री और सास खगड़िया शहर के एक होटल में मिठाई बनाने का काम करने लगे। इस बीच एक ही कमरे में सास और दामाद के रहने के कारण उनके बीच घनिष्ठता बढ़ती गई। दोनों का प्यार जिस्मानी रिश्ते में बदल गया और अंततः इतना परवान चढ़ा कि उन्होंने शादी ही रचा ली। बाद में मामले को तूल पकडने पर गांव में पंचायत बुलाई गई। लेकिन भरी पंचायत में भी दोनों ने अलग होने से इनकार करते हुए एक साथ जीने-मरने की कसमें खाई।
सिर्फ प्रेम-प्रसंग या हत्या-खुदकुशी नहीं है गीतिका शर्मा कांड
हरियाणा का सनसनीखेज गोपाल कांड़ा- गीतिका शर्मा कांड में जो तथ्य गीतिका के पोस्टमार्टम रिपोर्ट से जो घिनौना सच सामने आया है वह बेहद मानवीय संवेदनाओं को शर्मसार करनेवाला है। सिरसा में हुए जांच के रिपोर्ट के अनुसार गीतिका शर्मा के साथ न केवल शारीरिक संबंध बनाया जाता था, बल्कि उसके साथ अप्राकृतिक सेक्स भी किया जाता था।
चार डाक्टरों की टीम ने खुलासा किया गीतिका के जननांग काफी क्षतिग्रस्त थे। आगे पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार उसके साथ दरिंदगी जैसा व्यवहार किया जाता था और गीतिका के वैजिनल स्वैब लंबी कहानी कहते है।
हरियाणा से आ रही विचित्र खबरें
पिछले दो दशकों में लड़कियों के प्रति संवेदनहीनता को लेकर हरियाणा की बड़ी बदनामी हुई है। लगातार बढ़ते जेंडर गैप के कारण शादी के लिये लडकियाँ दूसरे राज्यों से खरीदी जा रहीं है। बिहार, झारखंड, पूर्वोतर राज्यों में सक्रिय दलाल 50 हजार से 3-4 लाख तक के रेट में लड़कियाँ सप्ली कर रहे है। इससे हरियाणा में बहूओं(खरीदी हुई) के प्रति संवेदना खत्म हुई है ओर उसे सेक्स प्रोडक्ट के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा है। ऐसी खबरें लगातार आ रही हैं कि एक बहू से तीन-चार भाई या फिर घर के सारे मर्द संबध बनाते हैं। नैतिक पतन की गहराई इतना बढ़ी है कि सब कुछ आपसी सहयोग से एक-दूसरे की जानकारी में हो रहा है। पूरे प्रदेश में, घर में महिलाओं की स्थिति कुछ ऐसी है कि उनकी एक नहीं चलती।
हरियाणा में बहू से 2 साल तक किया बलात्कार
जनवरी 2013 में हरियाणा से जहाँ 59 बर्षीय ससुर ने अपनी 25 बर्षीय बहू से लगातार 2 बर्षों तक बलात्कार करता रहा। दर्ज शिकायत के अनुसार लड़की की शादी साल 2010 में गुड़गांव निवासी नवीन के साथ हुई था। शादी के तीन माह बाद ही लड़की बार-बार मायके आ जाती और ससुराल जाने से इन्कार करती थी। बीते 18 दिसंबर को जब लड़की की ताई ने ससुराल लौटने के लिए उसे समझाने की कोशिश की तो सारी बातें सामने आई।
पुलिस अधीक्षक के अनुसार शिकायत में बताया गया है कि गुड़गांव पुराना रेलवे स्टेशन के पास सुरेश कुमार की अटैची की दुकान है। घर में ही दुकान होने के कारण वह चाय पीने के बहाने घर आता और पुत्रवधू के साथ दुष्कर्म करता। इस बारे में जब पति व सास को बताया गया तो उन्होंने भी ससुर का ही सहयोग किया। आरोप है कि ससुर के कमरे में आते ही सास दुलारी व पति बाहर से ताला लगा देते थे।
निठारी कांड
इस कांड की चर्चा देश ही नहीं विदेशों में भी हुई। कम उम्र की लड़कियों के साथ बलात्कार और तत्पश्चात् हत्या कर दी जाती थी। इतना ही नहीं आरोपी लड़कियों के जननांगों के माँस को कच्चा ही खा जाता था। यह वहशीपन कहीं न कहीं इंसान को जानवरों के श्रेणी में ही खड़ा करता है। 
कौन जाने कैसे रिश्ते हैं यहाँ
यह सिर्फ किसी फिल्मी गाने का मुखड़ा नहीं है। यह हकीकत है हमारे समाज का। अखबारों में बढती ये तंग खबरें गवाह है कि हम भले सब-कुछ नजरअंदाज कर रहें हैं, परंतु भारतीय समाज का नैतिक पतन जिस तेजी से हो रहा है वह अविश्वसनीय है। पश्चिम सभ्यता की तर्ज पर हमारे यहाँ भी नारी-पुरूष के रिश्तों में सेक्स ही पहली और अंतिम शर्त बनती जा रही है।
समाधान सुझाने की गुंजाईश
आज जब सामाजिक-नैतिक मूल्यों का पतन हुआ है तो सिर्फ कानून बनाकर हम महिलाओं को सुरक्षित नहीं कर सकते। आज ऐसे मौहाल बनाने की आवश्यकता है कि समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान पैदा हो। अगर हम इसमे सफल हुए तो सामाजिक सुरक्षा का दायरा स्वतः बढेगा और महिलाएँ सुरक्षति होंगी।
कैसे हो यह सब
सामाजिक मूल्यों को कुप्रभावित करने वाले तत्वों की मानिटरिंग हो। फिल्म, धारावाहिक और पौर्न इंटरटेनमेंट के सेंसर के नियम सख्त बनें और उनका सख्ती से पालन हो।
मोटे तौर पर हमें शौर्ट-टर्म और लौंग टर्म गोल को ध्यान में रखकर ही चलना होगा। ऐसा तो है नहीं कि हमने आज नैतिकता का पाठ पढाया, गंदी फिल्मों पर रोक लगायी और कल से सामाजिक चेतना प्रबल हो जायेगी। इसलिए जरूरी है कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर फास्ट ट्रैक सुनवाई की जो नीति चली है उस पर तटस्था से रहा जाये।
इसके साथ ही युवतियाँ और महिलाये यह समझें की प्रकृति ने उन्हें विश्व कि सबसे सुंदर कृति बनायी है तो वे भी उसका सम्मान करें। साड़ी और सलवार-कमीज की जगह जींस पहनने पर किसी को आपति नहीं होनी चाहिए। लेकिन आज की युवतियों को यह समझना होगा कि दुपट्टा का हटना फैशन हो सकता है लेकिन नारी स्वतंत्रता की कसौटी नहीं।
Amit Sinha is a Research Journalist. He is available at facebook.