रविवार को दिल्ली के कांस्टीच्यूशनल क्लब में बिहार के
मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने प्रधानमंत्री पद के मुद्दे पर अपनी पार्टी जद(यू) का
रूख स्पष्ट किया। नरेंद्र मोदी का नाम लिए बिना उन्होंने बड़ी शालीनता से अपनी बात
रखी और कहा कि देश का प्रधानमंत्री धर्मनिरपेक्ष छवि वाला ही हो। बिहार में न्याय
के साथ विकास की अपनी प्रतिबद्धता को दुहराते हुए नीतिश ने कहा कि हर प्रदेश का
विकास का अपना माडल होता है। परंतु माडल ऐसा हो जो समावेशी विकास में यकीन करे।
आगे नीतीश ने बड़े ही ओजस्वी और दार्शनिक अंदाज में कहा की गांधी जी का जो अंतिम
आदमी तक अगर विकास न पहुँचे तो वह विकास बेमानी है।
बिहार में सबका विश्वास जीता
बिहार की चर्चा पहले भी होती थी परंतु नरसंहार और फिरौती
के लिए। आज लोग उस दौर को याद तक नहीं करना चाहते जब बेर डूबते-डूबते लोग घर लौटने
पर मजबूर थे। और अगर घर लौटने में देर हुई तो परिजनों को फिरौती के लिए अपहरण की
आशंका हो जाती थी। जब आप विकास की बात करें तो यह भी देखे कि बिहार ने किस पड़ाव
से दौड़ शुरू की है। बिहार विकट परिस्थितियों से जूझता हुआ यहाँ तक पहुँचा है।
बिहार में न्याय के साथ विकास किया जा रहा है।
महादलितो और महिलाओं पर फोकस
समाज के सबसे तिरस्कृत और पिछड़े वर्ग को चुन कर उनके
जीवन को बेहतर करने के प्रयासों को बिहार में विकास के माडल का महत्वपूर्ण अंश
बताया। दलितों में भी जो सबसे पिछड़े थे उन्हें महादलित की पहचान दी गई और उनके
लिए सरकार के कार्यक्रमों में स्पेशल फोकस किया गया। नीतीश ने दावे के साथ कहा कि
अभी भी कई राज्यों में महिलाओं के आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा ही चल रही है परंतु
हमने 2006 में ही बिहार की पंचायतों
में 50 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू कर दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि दलित महिलाओं के लिए सरकारी नौकरियों के 3 प्रतिशत आरक्षण को उन्होनें प्रोत्साहित किया है। बिहार पुलिस में महिलाओं
के लिेए 35 प्रतिशत आरक्षण लागू कर दिया गया है।
शिक्षक बहाली में भी महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण
दिया गया है।
बिहार में गठबंधन कर रहा अच्छा काम
बिहार में सरकार के कार्यों की सराहना करते हुए नीतिश
कुमार ने भाजपा के सहयोग की भरपूर तारीफ की। आंकड़ो की गवाही देते हुए नीतिश ने
कहा कि बिहार में गठबंधन मजबूती से काम कर रहा है और एक दुसरे पर विश्वास है।
जदयू-भाजपा गठबंधन बिहार में बेहतरीन काम कर रहा है और कहीं कोई संशय नहीं है। हम
एक दूसरे का सम्मान करते हैं। देश में एनडीए की सरकार बने तो बेहतर होगा परंतु
नेतृत्व ऐसा हो जो सबको साथ लेकर साथ चले।
घर्मनिरपेक्षता से समझौता नहीं
नीतिश कुमार ने बड़े दबाव के साथ कहा कि वे राजनीति में
रहें या नहीं रहें परंतु कुछ बुनियादी सिद्दांतो से समझौता नहीं करेंगे। वे घर्मनिरपेक्षता
से समझौता नहीं करेंगे। न्याय के साथ विकास माडल से समझौता नहीं करेंगे।
याद रखें गठबंधन की मूल शर्तें
नीतिश ने बड़े ही बेहतरीन ढंग से भाजपा को यह याद दिलायी
की जदयू जो कि अपने मूल रूप में समता पार्टी हुआ करती थी, ने एनडीए में सहभागिता के साथ ही
कुछ आधारभूत बातों पर कौमन अजेंडा बनाया था। जिसमें महत्वपूर्ण थी कि दोनो दलो के
बीच 1. धारा 370 पर
कोई बहस नहीं होगी 2. अयोध्या राम मंदिर का
निर्माण का निर्णय या तो न्यायालय करेगी या दोनों संप्रदाय के सहयोग से होगा 3. कौमन सीविल कोड की चर्चा नहीं होगी।
वाजपेयी की तारीफ
नीतिश कुमार ने जहाँ एक तरफ नरेंद्र मोदी पर इशारो मे खूब
हमले किये वहीं भाजपा को कन्फ्यूज करने के लिए खूब तीर छोड़े। अटल बिहारी वाजपेयी
को सर्वमान्य नेता बताते हुए नीतिश ने कहा कि वाजपेयी ऐसे प्रधानमंत्री थे जो सबको
साथ लेकर चलते थे। अटल जी के समय में एऩडीए में नित् नयी पार्टीयाँ जुड़ी क्योंकि
उनकी छवि धर्मनिरपेक्ष थी और वे छोटों को भी सम्मान देते थे। अटल जी सभी को
राजधर्म का पालन करने की शिक्षा देते थे।
नीतिश के दार्शनिक अंदाज
''जीवन कुछ और नहीं मौत की अमानत है। कल
किसने देखा है। कुर्सी का मोह नहीं है। कुर्सी तो आती-जाती रहती है। जो सत्य है वह
यह कि सभी का अंत आना है। फिर जीवन में इतनी खट-पट क्यो?'', नीतिश की इन शब्दों को पूरा हाल पूरी तन्मयता से सुनने लगा और तालियों की
गड़गड़ाहट ने इन भावुक शब्दों का खूब अभिवादन किया।
बिहारी बोझ बनते नहीं, बोझ उठाते हैं.
बिहार में काम मिलने आज दूसरे राज्यों में बिहारी मजदूरों
की कमी हो रही है और लोग जानते हैं बिहारी मेहनतकश होते है, इसलिए कई राज्यों में कृषि कार्यों के लिए बिहारी मजदूरो की डिमांड बढ गई
है। आगे नीतिश ने कहा कि हम विकास के लिए मदद माँगते है। विशेष राज्य का दर्जा
माँगते हैं, तो गलत क्या है। झारखंड के अलग होने से
बिहार को अपूर्णीय क्षति हुई है। देश के पूर्वोत्तर राज्यों के साथ भी अन्याय हुआ
है।
नेतृत्व ऐसा हो जो देश को जोड़कर चले
भारत बहुभाषी, बहुधर्मी देश है। यहाँ ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो सबको साथ लेकर चले। इस
देश को जोर जर्बदस्ती से नहीं चलाया जा सकता। आपातकाल के दौरान जो कुछ हुआ उससे
देश ने इंदिरा गाँधी को नकार दिया। ट्रेन को समय से चलाने के लिए आपातकाल लगाने की
जरूरत नहीं है। इशारों ही इशारो में नीतिश ने नरेंद्र मोदी के विकास माडल पर आपति
भी दर्ज की। नीतिश ने कहा कि उस विकास का क्या फायदा जहाँ जीडीपी(Gross
Domestic Production) तो बढे, परंतु
कुपोषण की समस्या हो। जहाँ गरीबों को पीने का पानी ही न मिले। मानव विकास की बात
होनी चाहिए न की चुनिंदा विकास की।
