This story originally appeared at दैनिक जागरण, 23 सितंबर 2013
बीरबल ने आगे कहा- जहाँपनाह! हमारा देश खेती प्रधान है। खेती वर्षा पर आधारित है। वर्ष के बारह महीनों में से वर्षा के चार महीने यदि निकल जाएं, तो शेष क्या बचेगा? सूखा, दुर्भिक्ष, महामारी और मौत का तांडव। इस नई व्याख्या से सभा चमत्कृत रह गई।
बीरबर की जिरह का मूल गणित नहीं बल्कि सामयिक व प्रासंगिक था।
अल्पवृष्टि के कारण बिहार सूखाग्रस्त घोषित
अब जबकी बिहार सरकार ने राज्य के 33 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है इस नई घोषणा से सबसे ज्यादा उत्साह अधिकारियों में है। अबकी प्रश्न यह कि अगर 38 में से 33 जिले सूखाग्रस्त तो शेष क्या बचेगा? बीरबर के जिरह के विपरीत इसका जबाब मूल गणित ही है। और इस गणित से किसानों की निराशा कम नहीं होने वाली। परंतु राज्यभर में अधिकारियों द्दारा व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण मूल लाभुकों तक यह लाभ पहुँचेगा इसमें संदेह है। मुख्यमंत्री के इमानदार प्रयासों को असली चुनौती भ्रष्टाचार के इन्ही स्तंभों से है, जिसके कारण सरकार की बदनामी बढ़ रही है। और फिर, मुख्यमंत्री ने अगले ही दिन केंद्र से सूखाग्रस्त बिहरा के लिए 12000 करोड़ की माँग कर डाली।
कृषि मंत्री का हास्यादपद कुर्सीनामा
फिर राज्य के कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह राज्य के कृषकों प्रति कितने संजीदा हैं यह इसी बात से स्पष्ट है कि रविवार को गया क्लेक्टेरियट में सूखे की समीक्षा बैठक में वे गया डीएम बाला मुरूगन से इस बात पर भीड़ गए कि मीटिंग में कुर्सी पर बैठने के पहले उन्होने मंत्री साहब की अनुमति क्यों नही ली। इसके पहले भी नरेंद्र सिंह के गैर-जिम्मेदार हरकतों के कारण सरकार आलोचना की शिकार हुई है। पर अब चूँकि राज्य में बाढ़ और सूखे समानांतर चुनौती दे रही हैं तो सभी को मु्ख्यमंत्री की पहल में सहयोग देना चाहिए।
आसाराम के बैकुंठी चातुर्मास
बर्षा ऋतु के चार महीनों के लिए 'चातुर्मास' शब्द का प्रयोग होता है। प्राचीन समय में चातुर्मास की स्थापना के चार उद्देश्य माने जाते थे -आत्म विकास, धर्म का प्रचार, विशिष्ट साधना और क्षेत्रीय स्थिति। जिस क्षेत्र की स्थिति विषम हो, जनता अशांति, अराजकता या अत्याचारी शासक की क्रूरता की शिकार हो, उसके समाधान के लिए भी समता के प्रतीक साधु-साध्वियों का चातुर्मास करवाया जाता था। क्योंकि संत वस्तुतः वही होता है, जो औरों को शांति प्रदान करे।
फिर कहीं, जोधपुर के मजिस्ट्रेट ने संत श्री बापू आसाराम को इसलिए तो चातुर्मास के लिए “बैकुंठ” नहीं भेज दिया?
Amit Sinha is a bilingual columnist. He can be contacted at Facebook.amit

