Pages

Truth Of Thick Crowd At Adhikar Rally

सूत्रो के अनुसार अधिकार रैली में जुटी भीड़ को लाने में जदयू विधायकों ने अहम भुमिका निभाई। आईये चलें खगडिया जिला जहां नीतीश का प्रखर विरोध दिखा था और जहां से करीब 20 हजार लोगों ने रैली में शिरकत की। खगडिया के चुकटी (NH-31) मे 2 एकड़ प्लौट पर बना संभावी सदन की अपनी ही दास्तान हैं। नीतिश कुमार की जद(यू) के वर्तमान विधायक पूनम देवी एवं उनके पति एवं पुर्व विधायक रणवीर यादव का यह मकान खगडिया के लोगों के लिए खौफ का पर्याय ही है। वर्तमान विधायक श्रीमती पूनम देवी तो एक मुख्तारी(proxy) विधायक भर हैं, जबकि सारे अधिकार उनके पति और पूर्व विधायक रणवीर यादव ही इस्तेमाल करते हैं।

कौन है ऱणवीर यादव
पार्टी और पाले बदलने मे माहिर यह महत्वकांक्षी नेता पिछले महीने(सितंबर 2012) तब सुर्खियों में आया जब इसने नीतिश कुमार के अधिकार यात्रा के दौरान खगडिया में हुए व्यापक विरोध को दबाने के लिए दिन-दहाड़े कार्बाइन चलाया। बाद में मीडीया के दबाव से मामले ने तूल तो पकड़ा परंतु सुशासन बाबू के वरद्हस्त के कारण FIR तक दर्ज नहीं हो सका। पत्रकारों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बर्ष 1985 में लक्ष्मीपुरृ-तौफीर में वहां कम-से-कम 100 लोगों की हत्या हुई थी और वह घटना सप्ताहों तक अखबारो की सुर्खियाँ बना रहा। हालांकि सरकारी आंकडो में सिर्फ 9 की पुष्टि हुई। इस मामले मे रणवीर यादव को मुख्य आरोपी बनाया गया था।
परंतु भय और आतंक से गवाहों के न्यायालय तक नही पहुंच पाने के कारण न्यायालय ने उन्हे बरी कर दिया। जदयू विधायक पूनम देवी के इस बाहुबली पति पर अभी भी 20 ऐसे केस लंबित हैं जिसमें हत्या और अपहरण के ही दर्जन से ज्यादा मामले हैं। राजनैतिक सफर, महत्वकांक्षा और शतरंजी आखेट में माहिर आपराधिक पृष्ठभूमि वाला यह नेता बिहार के सभी राजनैतिक दल LJP, CPM, और RJD में बराबर की पैठ रखता है और बदलते समीकरण के साथ पाला भी बदल लेता है। रणवीर यादव के खिलाफ अपने भतीजे, भरत यादव की हत्या का मामला भी अभी निचली अदालत में चल ही रहा है कि इसी बर्ष दूसरे भतीजे की हत्या के प्रयास(u/s IPC 307) में एक और केस दर्ज कराया गया है। According to National Election Watch (NEW), an organisation of NGOs, the ruling JD(U) has the most number of candidates charged with serious offences. "Most of these charges against the women are filed because of the criminal background of their husbands and their supporters," says Anjesh Kumar, state coordinator,NEW.

अधिकार रैली में भूमिका
नीतिश के रैली में जहाँ 50 करोड़ से ज्यादा खर्च होने की बात दबी जुबान से स्वीकार की जा रही हैं वहीं भीड़ जुटाने में सफल रहे आयोजकों के उन तरीकों पर भी सवाल उठने लगे हैं, जिसके जरिये दूर-दराज से लोगों को भॆड़-बकडियों की तरह ट्रक, बस और ट्रेनों मे भर कर लाया गया। कुछ उद्दमी पत्रकारों ने यह दिखलाकर(विसुअल फुटेज के साथ) सनसनी फैला दी की ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं था कि वह पटना क्यों आये हैं। अभी आने वाले दिनों में अभी कई सवाल और उठेंगें भले ही रैली की सफलता की गूंज में उन्हें कम ही जगह मिले, परंतु सवाल तो उठेंगे। क्योंकि बाहुबलियों के दम पर चलनेवाली सुशासन सरकार की आपराधिक पृष्ठभूमि वाले विधायक नीतिश के साथ-साथ पोस्टरो से लेकर रैली के मंच तक नजर आये। ये वही नीतिश है जिनके पोस्टर पर नरेन्द्र मोदी को दिखलाये जाने के कारण घंटे भर के अंदर इतनी तेज प्रशासनिक कार्यवाई हूई कि पोस्टर बनाने वाली एजेंसी का तंबू ही पटना से उखाड़ दिया गया, और पुलिस प्रताड़ना तो मिली ही।